मुर्ख बारहसिंगा The reindeer story

 मुर्ख बारहसिंगा The reindeer story


एक जंगल में एक बारहसिंगा रहता था। बारहसिंगा देकने में बड़ा सुंदर था। एक दिन बारहसिंगा नदी में पानी पिने गया। जब वह नदी के पास आया तब उसका ध्यान नदी में पड़े उसके प्रतिबिम पर पड़ा। बारहसिंगा ने अपने शिंग प्रतिबिम्ब में देखे। अपने शिंग को देखकर वह बड़ा खुश हुवा। बारहसिंगा सोचने लगा की उसके शिंग कितने सुंदर हे। बारहसिंगा को अपने शिंगो पर अभिमान हो गया। तभी उसको अपने पैर को देखा। अपने पतले से पैर को देखकर उसे बड़ा दुःख हुवा और बोला मेरे पैर कितने ख़राब हे काश मेरे पैर मेरे शिंगो की तरह सुंदर होते। उसे अपने पैरो पर बड़ा गुस्सा आया। 

बारहसिंगा यह सोच ही रहा था की  उसने कुछ आवाज़ सुनी। उसने जंगल की और देखा।  जंगल मे से एक शिकारी उसकी तरफ दौड़ा चला आ रहा था। वह शिकारी बारहसिंगा का शिकार करना चाहता था। बारहसिंगा तो दूसरी तरफ भागा। शिकारी उसके पीछे भागा। बारहसिंगा आगे निकल गया। उसे लगा की वह अब बच जायेगा परंतु तभी उसके शिंग झाड़ियो में फस गए। वह अपने शिंग को निकाल ने के लिए महेनत करने लगा। बहुत ही प्रयत्न करने के बावजूत भी वह अपने सींग को निकाल ने में असमर्थ रहा। तभी वहा शिकारी पहोच गया और उसने एक तीर चलाया जोकि बारहसिंगा को लगा। बारहसिंगा घायल हो गया। अपने आखरी समय में बारहसिंगा सोचने लगा की मैं अपने पतले पैरों से घृणा करता था, जबकि यही पैर मुझे सुरक्षित यहां तक लाए और जिन सींगों पर मुझे इतना अभिमान था, वे ही मेरी मृत्यु का कारण बने। किसी ने ठीक ही कहा है, किसी चीज का सुंदर नहीं उपयोगी होना बेहतर है।’ यही सोचता सोचता बारहसिंगा मर गया ।


शिक्षा – सुंदरता नहीं गुणों को देखो।









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